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Currently viewing: Parva 14 -
Chapter 14.54
(35 verses)
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Sanskrit Text
मया
त्वदर्थमुक्तो
हि
वज्रपाणिः
पुरंदरः
।
उत्तङ्कायामृतं
देहि
तोयरूपमिति
प्रभुः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
मया | त्वद् + अर्थ | उक्तो | हि | वज्रपाणिः | पुरंदरः
उत्तङ्क + अमृत | देहि | तोय + रूप | इति | प्रभुः
उत्तङ्क + अमृत | देहि | तोय + रूप | इति | प्रभुः