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Currently viewing: Parva 14 -
Chapter 14.12
(14 verses)
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Sanskrit Text
अथ
वा
ते
स्वभावोऽयं
येन
पार्थावकृष्यसे
।
दृष्ट्वा
सभागतां
कृष्णामेकवस्त्रां
रजस्वलाम्
।
मिषतां
पाण्डवेयानां
न
तत्संस्मर्तुमिच्छसि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अथवा | ते | स्वभावो | ऽयं | येन | पार्थ + अवकृष्
दृष्ट्वा | सभा + गम् | कृष्णाम् | एक + वस्त्र | रजस्वलाम्
मिषतां | पाण्डवेयानां | न | तत् | संस्मर्तुम् | इच्छसि
दृष्ट्वा | सभा + गम् | कृष्णाम् | एक + वस्त्र | रजस्वलाम्
मिषतां | पाण्डवेयानां | न | तत् | संस्मर्तुम् | इच्छसि