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Currently viewing: Parva 14 -
Chapter 14.12
(14 verses)
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Sanskrit Text
स
त्वं
न
दुःखी
दुःखस्य
न
सुखी
सुसुखस्य
वा
।
स्मर्तुमिच्छसि
कौन्तेय
दिष्टं
हि
बलवत्तरम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | त्वं | न | दुःखी | दुःखस्य | न | सुखी | सु + सुख | वा
स्मर्तुम् | इच्छसि | कौन्तेय | दिष्टं | हि | बलवत्तरम्
स्मर्तुम् | इच्छसि | कौन्तेय | दिष्टं | हि | बलवत्तरम्