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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.18
(59 verses)
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Sanskrit Text
प्रणमन्तं
परिष्वज्य
मूर्ध्नि
चाघ्राय
पाण्डव
।
दिष्ट्या
दृष्टोऽसि
मे
पुत्र
कृतविद्य
इहागतः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पुत्र + स्नेह | परिष्वज्य | मूर्ध्नि | च + आघ्रा | माधव
दिष्ट्या | दृष्टो | ऽसि | मे | पुत्र | कृतविद्य | इह + आगम्
दिष्ट्या | दृष्टो | ऽसि | मे | पुत्र | कृतविद्य | इह + आगम्