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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.17
(171 verses)
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Sanskrit Text
ऋतुरृतुकरः
कालो
मधुर्मधुकरोऽचलः
।
वानस्पत्यो
वाजसेनो
नित्यमाश्रमपूजितः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ऋतुर् | ऋतुकरः | कालो | मधुर् | मधुकरो | ऽचलः
वानस्पत्यो | वाजसेनो | नित्यम् | आश्रम + पूजय्
वानस्पत्यो | वाजसेनो | नित्यम् | आश्रम + पूजय्