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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.117
(41 verses)
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Sanskrit Text
पितृदैवतयज्ञेषु
प्रोक्षितं
हविरुच्यते
।
विधिना
वेददृष्टेन
तद्भुक्त्वेह
न
दुष्यति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
पितृ + दैवत + यज्ञ | प्रोक्षितं | हविर् | उच्यते
विधिना | वेद + दृश् | तद् | भुज् + इह | न | दुष्यति
विधिना | वेद + दृश् | तद् | भुज् + इह | न | दुष्यति