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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.107
(148 verses)
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Sanskrit Text
आयुष्यं
प्राङ्मुखो
भुङ्क्ते
यशस्यं
दक्षिणामुखः
।
धन्यं
पश्चान्मुखो
भुङ्क्ते
ऋतं
भुङ्क्ते
उदङ्मुखः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यद् | वेष्टय् + शिरस् | भुङ्क्ते | यद् | भुङ्क्ते | दक्षिणा + मुख
यद् | वेष्टय् + शिरस् | भुङ्क्ते | यद् | भुङ्क्ते | दक्षिणा + मुख
यद् | वेष्टय् + शिरस् | भुङ्क्ते | यद् | भुङ्क्ते | दक्षिणा + मुख