Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.107
(148 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
नोत्सृजेत
पुरीषं
च
क्षेत्रे
ग्रामस्य
चान्तिके
।
उभे
मूत्रपुरीषे
तु
नाप्सु
कुर्यात्कदाचन
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न + उत्सृज् | पुरीषं | च | क्षेत्रे | ग्रामस्य | च + अन्तिक
उभे | मूत्र + पुरीष | तु | न + अप् | कुर्यात् | कदाचन
उभे | मूत्र + पुरीष | तु | न + अप् | कुर्यात् | कदाचन