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Currently viewing: Parva 13 -
Chapter 13.106
(42 verses)
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Sanskrit Text
तपः
प्रचक्षते
यावत्तावल्लोका
युधिष्ठिर
।
मतं
मम
तु
कौन्तेय
तपो
नानशनात्परम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तपः | प्रचक्षते | यावत् | तावत् + लोक | युधिष्ठिर
मतं | मम | तु | कौन्तेय | तपो | न + अनशन | परम्
मतं | मम | तु | कौन्तेय | तपो | न + अनशन | परम्