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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.88
(38 verses)
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Sanskrit Text
शाखानगरमर्हस्तु
सहस्रपतिरुत्तमम्
।
धान्यहैरण्यभोगेन
भोक्तुं
राष्ट्रिय
उद्यतः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शाखानगरम् | अर्ह + तु | सहस्रपतिर् | उत्तमम्
धान्य + हैरण्य + भोग | भोक्तुं | राष्ट्रिय | उद्यतः
धान्य + हैरण्य + भोग | भोक्तुं | राष्ट्रिय | उद्यतः