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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.329
(50 verses)
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❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
अथ
ता
विश्वरूपोऽब्रवीदद्यैव
सेन्द्रा
देवा
न
भविष्यन्तीति
।
ततो
मन्त्राञ्जजाप
।
तैर्मन्त्रैः
प्रावर्धत
त्रिशिराः
।
एकेनास्येन
सर्वलोकेषु
द्विजैः
क्रियावद्भिर्यज्ञेषु
सुहुतं
सोमं
पपावेकेनाप
एकेन
सेन्द्रान्देवान्
।
अथेन्द्रस्तं
विवर्धमानं
सोमपानाप्यायितसर्वगात्रं
दृष्ट्वा
चिन्तामापेदे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अथ | ता | विश्वरूपो | ऽब्रवीद् | अद्य + एव | स + इन्द्र | देवा | न | भू + इति
ततो | मन्त्राञ् | जजाप
तैर् | मन्त्रैः | प्रावर्धत | त्रिशिराः
एक + आस्य | सर्व + लोक | द्विजैः | क्रियावद्भिर् | यज्ञेषु | सु + हु | सोमं | पा + एक + अप् | एकेन | स + इन्द्र | देवान्
अथ + इन्द्र + तद् | विवर्धमानं | सोम + पान + आप्यायय् + सर्व + गात्र | दृष्ट्वा | चिन्ताम् | आपेदे
ततो | मन्त्राञ् | जजाप
तैर् | मन्त्रैः | प्रावर्धत | त्रिशिराः
एक + आस्य | सर्व + लोक | द्विजैः | क्रियावद्भिर् | यज्ञेषु | सु + हु | सोमं | पा + एक + अप् | एकेन | स + इन्द्र | देवान्
अथ + इन्द्र + तद् | विवर्धमानं | सोम + पान + आप्यायय् + सर्व + गात्र | दृष्ट्वा | चिन्ताम् | आपेदे