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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.329
(50 verses)
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Sanskrit Text
तास्त्वाष्ट्र
उवाच
।
क्व
गमिष्यथ
आस्यतां
तावन्मया
सह
श्रेयो
भविष्यतीति
।
तास्तमब्रुवन्
।
वयं
देवस्त्रियोऽप्सरस
इन्द्रं
वरदं
पुरा
प्रभविष्णुं
वृणीमह
इति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तद् + त्वाष्ट्र | उवाच
क्व | गमिष्यथ | आस्यतां | तावत् + मद् | सह | श्रेयो | भू + इति
तद् | अब्रुवन्
वयं | देव + स्त्री | ऽप्सरस | इन्द्रं | वर + द | पुरा | प्रभविष्णुं | वृणीमह | इति
क्व | गमिष्यथ | आस्यतां | तावत् + मद् | सह | श्रेयो | भू + इति
तद् | अब्रुवन्
वयं | देव + स्त्री | ऽप्सरस | इन्द्रं | वर + द | पुरा | प्रभविष्णुं | वृणीमह | इति