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Currently viewing: Parva 12 - Chapter 12.329 (50 verses)
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Chapter 12.329 - Verse 18

Sanskrit Text

अथ हिरण्यकशिपुं पुरस्कृत्य विश्वरूपमातरं स्वसारमसुरा वरमयाचन्त हे स्वसरयं ते पुत्रस्त्वाष्ट्रो विश्वरूपस्त्रिशिरा देवानां पुरोहितः प्रत्यक्षं देवेभ्यो भागमददत्परोक्षमस्माकम् ततो देवा वर्धन्ते वयं क्षीयामः तदेनं त्वं वारयितुमर्हसि तथा यथास्मान्भजेदिति

Padaccheda (Word Analysis)

अथ | हिरण्यकशिपुं | पुरस्कृत्य | विश्वरूप + मातृ | स्वसारम् | असुरा | वरम् | अयाचन्त
हे | स्वसर् | अयं | ते | पुत्र + त्वाष्ट्र | विश्वरूप + त्रिशिरस् | देवानां | पुरोहितः | प्रत्यक्षं | देवेभ्यो | भागम् | अददत् | परोक्षम् | अस्माकम्
ततो | देवा | वर्धन्ते | वयं | क्षीयामः
तद् | एनं | त्वं | वारयितुम् | अर्हसि | तथा | यथा + मद् | भजेद् | इति