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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.329
(50 verses)
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Sanskrit Text
देवाश्च
ते
सहेन्द्रेण
ब्रह्माणमभिजग्मुरूचुश्च
।
विश्वरूपेण
सर्वयज्ञेषु
सुहुतः
सोमः
पीयते
।
वयमभागाः
संवृत्ताः
।
असुरपक्षो
वर्धते
वयं
क्षीयामः
।
तदर्हसि
नो
विधातुं
श्रेयो
यदनन्तरमिति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
देव + च | ते | सह + इन्द्र | ब्रह्माणम् | अभिजग्मुर् | वच् + च
विश्वरूपेण | सर्व + यज्ञ | सु + हु | सोमः | पीयते
वयम् | अ + भाग | संवृत्ताः
ततो | देवा | वर्धन्ते | वयं | क्षीयामः
तद् | अर्हसि | नो | विधातुं | श्रेयो | यद् | अनन्तरम् | इति
विश्वरूपेण | सर्व + यज्ञ | सु + हु | सोमः | पीयते
वयम् | अ + भाग | संवृत्ताः
ततो | देवा | वर्धन्ते | वयं | क्षीयामः
तद् | अर्हसि | नो | विधातुं | श्रेयो | यद् | अनन्तरम् | इति