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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.325
(4 verses)
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Sanskrit Text
नमस्ते
देवदेव
[1]
निष्क्रिय
[2]
निर्गुण
[3]
लोकसाक्षिन्
[4]
क्षेत्रज्ञ
[5]
अनन्त
[6=116]
पुरुष
[7]
महापुरुष
[8]
त्रिगुण
[9]
प्रधान
[10]
।
अमृत
[11]
व्योम
[12]
सनातन
[13]
सदसद्व्यक्ताव्यक्त
[14]
ऋतधामन्
[15]
पूर्वादिदेव
[16]
वसुप्रद
[17]
प्रजापते
[18]
सुप्रजापते
[19]
वनस्पते
[20]
।
महाप्रजापते
[21]
ऊर्जस्पते
[22]
वाचस्पते
[23]
मनस्पते
[24]
जगत्पते
[25]
दिवस्पते
[26]
मरुत्पते
[27]
सलिलपते
[28]
पृथिवीपते
[29]
दिक्पते
[30]
।
पूर्वनिवास
[31]
ब्रह्मपुरोहित
[32]
ब्रह्मकायिक
[33]
महाकायिक
[34]
महाराजिक
[35]
चतुर्महाराजिक
[36]
आभासुर
[37]
महाभासुर
[38]
सप्तमहाभासुर
[39]
याम्य
[40]
।
महायाम्य
[41]
संज्ञासंज्ञ
[42]
तुषित
[43]
महातुषित
[44]
प्रतर्दन
[45]
परिनिर्मित
[46]
वशवर्तिन्
[47]
अपरिनिर्मित
[48]
यज्ञ
[49]
महायज्ञ
[50]
।
यज्ञसंभव
[51]
यज्ञयोने
[52]
यज्ञगर्भ
[53]
यज्ञहृदय
[54]
यज्ञस्तुत
[55]
यज्ञभागहर
[56]
पञ्चयज्ञधर
[57]
पञ्चकालकर्तृगते
[58]
पञ्चरात्रिक
[59]
वैकुण्ठ
[60]
।
अपराजित
[61]
मानसिक
[62]
परमस्वामिन्
[63]
सुस्नात
[64]
हंस
[65]
परमहंस
[66]
परमयाज्ञिक
[67]
सांख्ययोग
[68]
अमृतेशय
[69]
हिरण्येशय
[70]
।
वेदेशय
[71]
कुशेशय
[72]
ब्रह्मेशय
[73]
पद्मेशय
[74]
विश्वेश्वर
[75]
त्वं
जगदन्वयः
[76]
त्वं
जगत्प्रकृतिः
[77]
तवाग्निरास्यम्
[78]
वडवामुखोऽग्निः
[79]
त्वमाहुतिः
[80]
।
त्वं
सारथिः
[81]
त्वं
वषट्कारः
[82]
त्वमोंकारः
[83]
त्वं
मनः
[84]
त्वं
चन्द्रमाः
[85]
त्वं
चक्षुराद्यम्
[86]
त्वं
सूर्यः
[87]
त्वं
दिशां
गजः
[88]
दिग्भानो
[89]
हयशिरः
[90]
।
प्रथमत्रिसौपर्ण
[91]
पञ्चाग्ने
[92]
त्रिणाचिकेत
[93]
षडङ्गविधान
[94]
प्राग्ज्योतिष
[95]
ज्येष्ठसामग
[96]
सामिकव्रतधर
[97]
अथर्वशिरः
[98]
पञ्चमहाकल्प
[99]
फेनपाचार्य
[100]
।
वालखिल्य
[101]
वैखानस
[102]
अभग्नयोग
[103]
अभग्नपरिसंख्यान
[104]
युगादे
[105]
युगमध्य
[106]
युगनिधन
[107]
आखण्डल
[108]
प्राचीनगर्भ
[109]
कौशिक
[110]
।
पुरुष्टुत
[111]
पुरुहूत
[112]
विश्वरूप
[113]
अनन्तगते
[114]
अनन्तभोग
[115]
अनन्त
[116=6]
अनादे
[117]
अमध्य
[118]
अव्यक्तमध्य
[119]
अव्यक्तनिधन
[120]
।
व्रतावास
[121]
समुद्राधिवास
[122]
यशोवास
[123]
तपोवास
[124]
लक्ष्म्यावास
[125]
विद्यावास
[126]
कीर्त्यावास
[127]
श्रीवास
[128]
सर्वावास
[129]
वासुदेव
[130]
।
सर्वच्छन्दक
[131]
हरिहय
[132]
हरिमेध
[133]
महायज्ञभागहर
[134]
वरप्रद
[135=157]
यमनियममहानियमकृच्छ्रातिकृच्छ्रमहाकृच्छ्रसर्वकृच्छ्रनियमधर
[136]
निवृत्तधर्मप्रवचनगते
[137]
प्रवृत्तवेदक्रिय
[138]
अज
[139]
सर्वगते
[140]
।
सर्वदर्शिन्
[141]
अग्राह्य
[142]
अचल
[143]
महाविभूते
[144]
माहात्म्यशरीर
[145]
पवित्र
[146]
महापवित्र
[147]
हिरण्मय
[148]
बृहत्
[149]
अप्रतर्क्य
[150]
।
अविज्ञेय
[151]
ब्रह्माग्र्य
[152]
प्रजासर्गकर
[153]
प्रजानिधनकर
[154]
महामायाधर
[155]
चित्रशिखण्डिन्
[156]
वरप्रद
[157=135]
पुरोडाशभागहर
[158]
गताध्वन्
[159]
छिन्नतृष्ण
[160]
।
छिन्नसंशय
[161]
सर्वतोनिवृत्त
[162]
ब्राह्मणरूप
[163]
ब्राह्मणप्रिय
[164]
विश्वमूर्ते
[165]
महामूर्ते
[166]
बान्धव
[167]
भक्तवत्सल
[168]
ब्रह्मण्यदेव
[169]
भक्तोऽहं
त्वां
दिदृक्षुः
[170]
एकान्तदर्शनाय
नमो
नमः
[171]
॥
Padaccheda (Word Analysis)
नमस् + त्वद् | देवदेव | निष्क्रिय | निर्गुण | लोकसाक्षिन् | क्षेत्रज्ञ | अनन्त | पुरुष | महापुरुष | त्रिगुण | प्रधान
अमृत | व्योम | सनातन | अस् + असत् + व्यक्त + अव्यक्त | ऋतधामन् | पूर्व + आदि + देव | वसु + प्रद | प्रजापते | सु + प्रजापति | वनस्पते
महाप्रजापते | ऊर्जस्पते | वाचस्पते | मनस्पते | जगत्पते | दिवस्पते | मरुत्पते | सलिलपते | पृथिवीपते | दिक्पते
पूर्व + निवास | ब्रह्मन् + पुरोहित | ब्रह्मकायिक | महाकायिक | महाराजिक | चतुर्महाराजिक | आभासुर | महाभासुर | सप्तन् + महत् + भासुर | याम्य
महायाम्य | संज्ञा + असंज्ञ | तुषित | महातुषित | प्रतर्दन | परिनिर्मित | वशवर्तिन् | अपरिनिर्मित | यज्ञ | महायज्ञ
यज्ञ + सम्भव | यज्ञ + योनि | यज्ञ + गर्भ | यज्ञ + हृदय | यज्ञ + स्तु | यज्ञ + भाग + हर | पञ्चयज्ञ + धर | पञ्चन् + काल + कर्तृ + गति | पञ्चन् + रात्रिक | वैकुण्ठ
अपराजित | मानसिक | परम + स्वामिन् | सु + स्ना | हंस | परमहंस | परम + याज्ञिक | सांख्ययोग | अमृतेशय | हिरण्येशय
वेदेशय | कुशेशय | ब्रह्मेशय | पद्मेशय | विश्वेश्वर | त्वं | जगन्त् + अन्वय | त्वं | जगन्त् + प्रकृति | त्वद् + अग्नि | आस्यम् | वडवामुखो | ऽग्निः | त्वम् | आहुतिः
त्वं | सारथिः | त्वं | वषट्कारः | त्वम् | ओंकारः | त्वं | मनः | त्वं | चन्द्रमाः | त्वं | चक्षुर् | आद्यम् | त्वं | सूर्यः | त्वं | दिशां | गजः | दिश् + भानु | हयशिरः
प्रथमत्रिसौपर्ण | पञ्चन् + अग्नि | त्रिणाचिकेत | षडङ्ग + विधान | प्राग्ज्योतिष | ज्येष्ठ + सामन् + ग | सामिक + व्रत + धर | अथर्वशिरः | पञ्चमहाकल्प | फेनप + आचार्य
वालखिल्य | वैखानस | अभग्न + योग | अभग्न + परिसंख्यान | युग + आदि | युग + मध्य | युग + निधन | आखण्डल | प्राचीनगर्भ | कौशिक
पुरुष्टुत | पुरुहूत | विश्वरूप | अनन्त + गम् | अनन्त + भोग | अनन्त | अनादे | अमध्य | अव्यक्त + मध्य | अव्यक्त + निधन
व्रत + आवास | समुद्र + अधिवास | यशस् + वास | तपस् + वास | लक्ष्मी + आवास | विद्या + वास | कीर्ति + आवास | श्रीवास | सर्व + आवास | वासुदेव
सर्व + छन्दक | हरिहय | हरिमेध | महायज्ञ + भाग + हर | वर + प्रद | यम + नियम + महानियम + कृच्छ्रातिकृच्छ्र + महत् + कृच्छ्र + सर्व + धर | निवृत् + धर्म + प्रवचन + गति | प्रवृत् + वेद + क्रिया | अज | सर्व + गति
सर्व + दर्शिन् | अग्राह्य | अचल | महत् + विभूति | माहात्म्य + शरीर | पवित्र | महत् + पवित्र | हिरण्मय | बृहत् | अप्रतर्क्य
अविज्ञेय | ब्रह्मन् + अग्र्य | प्रजा + सर्ग + कर | प्रजा + निधन + कर | महत् + माया + धर | चित्रशिखण्डिन् | वर + प्रद | पुरोडाश + भाग + हर | गताध्वन् | छिद् + तृष्णा
छिद् + संशय | सर्वतस् + निवृत् | ब्राह्मण + रूप | ब्राह्मणप्रिय | विश्वमूर्ते | महत् + मूर्ति | बान्धव | भक्त + वत्सल | ब्रह्मण्यदेव | भक्तो | ऽहं | त्वां | दिदृक्षुः | एकान्त + दर्शन | नमो | नमः
अमृत | व्योम | सनातन | अस् + असत् + व्यक्त + अव्यक्त | ऋतधामन् | पूर्व + आदि + देव | वसु + प्रद | प्रजापते | सु + प्रजापति | वनस्पते
महाप्रजापते | ऊर्जस्पते | वाचस्पते | मनस्पते | जगत्पते | दिवस्पते | मरुत्पते | सलिलपते | पृथिवीपते | दिक्पते
पूर्व + निवास | ब्रह्मन् + पुरोहित | ब्रह्मकायिक | महाकायिक | महाराजिक | चतुर्महाराजिक | आभासुर | महाभासुर | सप्तन् + महत् + भासुर | याम्य
महायाम्य | संज्ञा + असंज्ञ | तुषित | महातुषित | प्रतर्दन | परिनिर्मित | वशवर्तिन् | अपरिनिर्मित | यज्ञ | महायज्ञ
यज्ञ + सम्भव | यज्ञ + योनि | यज्ञ + गर्भ | यज्ञ + हृदय | यज्ञ + स्तु | यज्ञ + भाग + हर | पञ्चयज्ञ + धर | पञ्चन् + काल + कर्तृ + गति | पञ्चन् + रात्रिक | वैकुण्ठ
अपराजित | मानसिक | परम + स्वामिन् | सु + स्ना | हंस | परमहंस | परम + याज्ञिक | सांख्ययोग | अमृतेशय | हिरण्येशय
वेदेशय | कुशेशय | ब्रह्मेशय | पद्मेशय | विश्वेश्वर | त्वं | जगन्त् + अन्वय | त्वं | जगन्त् + प्रकृति | त्वद् + अग्नि | आस्यम् | वडवामुखो | ऽग्निः | त्वम् | आहुतिः
त्वं | सारथिः | त्वं | वषट्कारः | त्वम् | ओंकारः | त्वं | मनः | त्वं | चन्द्रमाः | त्वं | चक्षुर् | आद्यम् | त्वं | सूर्यः | त्वं | दिशां | गजः | दिश् + भानु | हयशिरः
प्रथमत्रिसौपर्ण | पञ्चन् + अग्नि | त्रिणाचिकेत | षडङ्ग + विधान | प्राग्ज्योतिष | ज्येष्ठ + सामन् + ग | सामिक + व्रत + धर | अथर्वशिरः | पञ्चमहाकल्प | फेनप + आचार्य
वालखिल्य | वैखानस | अभग्न + योग | अभग्न + परिसंख्यान | युग + आदि | युग + मध्य | युग + निधन | आखण्डल | प्राचीनगर्भ | कौशिक
पुरुष्टुत | पुरुहूत | विश्वरूप | अनन्त + गम् | अनन्त + भोग | अनन्त | अनादे | अमध्य | अव्यक्त + मध्य | अव्यक्त + निधन
व्रत + आवास | समुद्र + अधिवास | यशस् + वास | तपस् + वास | लक्ष्मी + आवास | विद्या + वास | कीर्ति + आवास | श्रीवास | सर्व + आवास | वासुदेव
सर्व + छन्दक | हरिहय | हरिमेध | महायज्ञ + भाग + हर | वर + प्रद | यम + नियम + महानियम + कृच्छ्रातिकृच्छ्र + महत् + कृच्छ्र + सर्व + धर | निवृत् + धर्म + प्रवचन + गति | प्रवृत् + वेद + क्रिया | अज | सर्व + गति
सर्व + दर्शिन् | अग्राह्य | अचल | महत् + विभूति | माहात्म्य + शरीर | पवित्र | महत् + पवित्र | हिरण्मय | बृहत् | अप्रतर्क्य
अविज्ञेय | ब्रह्मन् + अग्र्य | प्रजा + सर्ग + कर | प्रजा + निधन + कर | महत् + माया + धर | चित्रशिखण्डिन् | वर + प्रद | पुरोडाश + भाग + हर | गताध्वन् | छिद् + तृष्णा
छिद् + संशय | सर्वतस् + निवृत् | ब्राह्मण + रूप | ब्राह्मणप्रिय | विश्वमूर्ते | महत् + मूर्ति | बान्धव | भक्त + वत्सल | ब्रह्मण्यदेव | भक्तो | ऽहं | त्वां | दिदृक्षुः | एकान्त + दर्शन | नमो | नमः