Vidya Kendra
Mahābhārata
Home Introduction Reader Glossary All Resources
Vidyakendra
Vidyakendra Home

Navigate to Verse

Currently viewing: Parva 12 - Chapter 12.325 (4 verses)
Powered by Aksharamukha

Search Mahābhārata

Try searching for: dharma, युद्ध, Arjuna, 1.1.5 (verse reference)
❖ ❖ ❖
Chapter 12.325 - Verse 4

Sanskrit Text

नमस्ते देवदेव [1] निष्क्रिय [2] निर्गुण [3] लोकसाक्षिन् [4] क्षेत्रज्ञ [5] अनन्त [6=116] पुरुष [7] महापुरुष [8] त्रिगुण [9] प्रधान [10] अमृत [11] व्योम [12] सनातन [13] सदसद्व्यक्ताव्यक्त [14] ऋतधामन् [15] पूर्वादिदेव [16] वसुप्रद [17] प्रजापते [18] सुप्रजापते [19] वनस्पते [20] महाप्रजापते [21] ऊर्जस्पते [22] वाचस्पते [23] मनस्पते [24] जगत्पते [25] दिवस्पते [26] मरुत्पते [27] सलिलपते [28] पृथिवीपते [29] दिक्पते [30] पूर्वनिवास [31] ब्रह्मपुरोहित [32] ब्रह्मकायिक [33] महाकायिक [34] महाराजिक [35] चतुर्महाराजिक [36] आभासुर [37] महाभासुर [38] सप्तमहाभासुर [39] याम्य [40] महायाम्य [41] संज्ञासंज्ञ [42] तुषित [43] महातुषित [44] प्रतर्दन [45] परिनिर्मित [46] वशवर्तिन् [47] अपरिनिर्मित [48] यज्ञ [49] महायज्ञ [50] यज्ञसंभव [51] यज्ञयोने [52] यज्ञगर्भ [53] यज्ञहृदय [54] यज्ञस्तुत [55] यज्ञभागहर [56] पञ्चयज्ञधर [57] पञ्चकालकर्तृगते [58] पञ्चरात्रिक [59] वैकुण्ठ [60] अपराजित [61] मानसिक [62] परमस्वामिन् [63] सुस्नात [64] हंस [65] परमहंस [66] परमयाज्ञिक [67] सांख्ययोग [68] अमृतेशय [69] हिरण्येशय [70] वेदेशय [71] कुशेशय [72] ब्रह्मेशय [73] पद्मेशय [74] विश्वेश्वर [75] त्वं जगदन्वयः [76] त्वं जगत्प्रकृतिः [77] तवाग्निरास्यम् [78] वडवामुखोऽग्निः [79] त्वमाहुतिः [80] त्वं सारथिः [81] त्वं वषट्कारः [82] त्वमोंकारः [83] त्वं मनः [84] त्वं चन्द्रमाः [85] त्वं चक्षुराद्यम् [86] त्वं सूर्यः [87] त्वं दिशां गजः [88] दिग्भानो [89] हयशिरः [90] प्रथमत्रिसौपर्ण [91] पञ्चाग्ने [92] त्रिणाचिकेत [93] षडङ्गविधान [94] प्राग्ज्योतिष [95] ज्येष्ठसामग [96] सामिकव्रतधर [97] अथर्वशिरः [98] पञ्चमहाकल्प [99] फेनपाचार्य [100] वालखिल्य [101] वैखानस [102] अभग्नयोग [103] अभग्नपरिसंख्यान [104] युगादे [105] युगमध्य [106] युगनिधन [107] आखण्डल [108] प्राचीनगर्भ [109] कौशिक [110] पुरुष्टुत [111] पुरुहूत [112] विश्वरूप [113] अनन्तगते [114] अनन्तभोग [115] अनन्त [116=6] अनादे [117] अमध्य [118] अव्यक्तमध्य [119] अव्यक्तनिधन [120] व्रतावास [121] समुद्राधिवास [122] यशोवास [123] तपोवास [124] लक्ष्म्यावास [125] विद्यावास [126] कीर्त्यावास [127] श्रीवास [128] सर्वावास [129] वासुदेव [130] सर्वच्छन्दक [131] हरिहय [132] हरिमेध [133] महायज्ञभागहर [134] वरप्रद [135=157] यमनियममहानियमकृच्छ्रातिकृच्छ्रमहाकृच्छ्रसर्वकृच्छ्रनियमधर [136] निवृत्तधर्मप्रवचनगते [137] प्रवृत्तवेदक्रिय [138] अज [139] सर्वगते [140] सर्वदर्शिन् [141] अग्राह्य [142] अचल [143] महाविभूते [144] माहात्म्यशरीर [145] पवित्र [146] महापवित्र [147] हिरण्मय [148] बृहत् [149] अप्रतर्क्य [150] अविज्ञेय [151] ब्रह्माग्र्य [152] प्रजासर्गकर [153] प्रजानिधनकर [154] महामायाधर [155] चित्रशिखण्डिन् [156] वरप्रद [157=135] पुरोडाशभागहर [158] गताध्वन् [159] छिन्नतृष्ण [160] छिन्नसंशय [161] सर्वतोनिवृत्त [162] ब्राह्मणरूप [163] ब्राह्मणप्रिय [164] विश्वमूर्ते [165] महामूर्ते [166] बान्धव [167] भक्तवत्सल [168] ब्रह्मण्यदेव [169] भक्तोऽहं त्वां दिदृक्षुः [170] एकान्तदर्शनाय नमो नमः [171]

Padaccheda (Word Analysis)

नमस् + त्वद् | देवदेव | निष्क्रिय | निर्गुण | लोकसाक्षिन् | क्षेत्रज्ञ | अनन्त | पुरुष | महापुरुष | त्रिगुण | प्रधान
अमृत | व्योम | सनातन | अस् + असत् + व्यक्त + अव्यक्त | ऋतधामन् | पूर्व + आदि + देव | वसु + प्रद | प्रजापते | सु + प्रजापति | वनस्पते
महाप्रजापते | ऊर्जस्पते | वाचस्पते | मनस्पते | जगत्पते | दिवस्पते | मरुत्पते | सलिलपते | पृथिवीपते | दिक्पते
पूर्व + निवास | ब्रह्मन् + पुरोहित | ब्रह्मकायिक | महाकायिक | महाराजिक | चतुर्महाराजिक | आभासुर | महाभासुर | सप्तन् + महत् + भासुर | याम्य
महायाम्य | संज्ञा + असंज्ञ | तुषित | महातुषित | प्रतर्दन | परिनिर्मित | वशवर्तिन् | अपरिनिर्मित | यज्ञ | महायज्ञ
यज्ञ + सम्भव | यज्ञ + योनि | यज्ञ + गर्भ | यज्ञ + हृदय | यज्ञ + स्तु | यज्ञ + भाग + हर | पञ्चयज्ञ + धर | पञ्चन् + काल + कर्तृ + गति | पञ्चन् + रात्रिक | वैकुण्ठ
अपराजित | मानसिक | परम + स्वामिन् | सु + स्ना | हंस | परमहंस | परम + याज्ञिक | सांख्ययोग | अमृतेशय | हिरण्येशय
वेदेशय | कुशेशय | ब्रह्मेशय | पद्मेशय | विश्वेश्वर | त्वं | जगन्त् + अन्वय | त्वं | जगन्त् + प्रकृति | त्वद् + अग्नि | आस्यम् | वडवामुखो | ऽग्निः | त्वम् | आहुतिः
त्वं | सारथिः | त्वं | वषट्कारः | त्वम् | ओंकारः | त्वं | मनः | त्वं | चन्द्रमाः | त्वं | चक्षुर् | आद्यम् | त्वं | सूर्यः | त्वं | दिशां | गजः | दिश् + भानु | हयशिरः
प्रथमत्रिसौपर्ण | पञ्चन् + अग्नि | त्रिणाचिकेत | षडङ्ग + विधान | प्राग्ज्योतिष | ज्येष्ठ + सामन् + ग | सामिक + व्रत + धर | अथर्वशिरः | पञ्चमहाकल्प | फेनप + आचार्य
वालखिल्य | वैखानस | अभग्न + योग | अभग्न + परिसंख्यान | युग + आदि | युग + मध्य | युग + निधन | आखण्डल | प्राचीनगर्भ | कौशिक
पुरुष्टुत | पुरुहूत | विश्वरूप | अनन्त + गम् | अनन्त + भोग | अनन्त | अनादे | अमध्य | अव्यक्त + मध्य | अव्यक्त + निधन
व्रत + आवास | समुद्र + अधिवास | यशस् + वास | तपस् + वास | लक्ष्मी + आवास | विद्या + वास | कीर्ति + आवास | श्रीवास | सर्व + आवास | वासुदेव
सर्व + छन्दक | हरिहय | हरिमेध | महायज्ञ + भाग + हर | वर + प्रद | यम + नियम + महानियम + कृच्छ्रातिकृच्छ्र + महत् + कृच्छ्र + सर्व + धर | निवृत् + धर्म + प्रवचन + गति | प्रवृत् + वेद + क्रिया | अज | सर्व + गति
सर्व + दर्शिन् | अग्राह्य | अचल | महत् + विभूति | माहात्म्य + शरीर | पवित्र | महत् + पवित्र | हिरण्मय | बृहत् | अप्रतर्क्य
अविज्ञेय | ब्रह्मन् + अग्र्य | प्रजा + सर्ग + कर | प्रजा + निधन + कर | महत् + माया + धर | चित्रशिखण्डिन् | वर + प्रद | पुरोडाश + भाग + हर | गताध्वन् | छिद् + तृष्णा
छिद् + संशय | सर्वतस् + निवृत् | ब्राह्मण + रूप | ब्राह्मणप्रिय | विश्वमूर्ते | महत् + मूर्ति | बान्धव | भक्त + वत्सल | ब्रह्मण्यदेव | भक्तो | ऽहं | त्वां | दिदृक्षुः | एकान्त + दर्शन | नमो | नमः