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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.273
(63 verses)
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Sanskrit Text
आहूयाप्सरसो
देवस्ततो
लोकपितामहः
।
वाचा
मधुरया
प्राह
सान्त्वयन्निव
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
आह्वा + अप्सरस् | देव + ततस् | लोकपितामहः
स्वरेण | मधुर + अथ | सान्त्वयन्न् | इव | भारत
स्वरेण | मधुर + अथ | सान्त्वयन्न् | इव | भारत