Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.271
(69 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
सोऽस्मादथ
भ्रश्यति
कालयोगा;त्कृष्णे
तले
तिष्ठति
सर्वकष्टे
।
यथा
त्वयं
सिध्यति
जीवलोक;स्तत्तेऽभिधास्याम्यसुरप्रवीर
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सो | ऽस्माद् | अथ | भ्रश्यति | काल + योग | कृष्णे | तले | तिष्ठति | सर्व + कष्ट
यथा | तु + इदम् | सिध्यति | जीव + लोक | तत् | ते | अभिधा + असुर + प्रवीर
यथा | तु + इदम् | सिध्यति | जीव + लोक | तत् | ते | अभिधा + असुर + प्रवीर