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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.27
(32 verses)
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Sanskrit Text
सत्यकञ्चुकमास्थाय
मयोक्तो
गुरुराहवे
।
अश्वत्थामा
हत
इति
कुञ्जरे
विनिपातिते
।
कान्नु
लोकान्गमिष्यामि
कृत्वा
तत्कर्म
दारुणम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सत्य + कञ्चुक | आस्थाय | मद् + वच् | गुरुर् | आहवे
अश्वत्थामा | हत | इति | कुञ्जरे | विनिपातिते
क + नु | लोकान् | गमिष्यामि | कृत्वा | तत् | कर्म | दारुणम्
अश्वत्थामा | हत | इति | कुञ्जरे | विनिपातिते
क + नु | लोकान् | गमिष्यामि | कृत्वा | तत् | कर्म | दारुणम्