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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.165
(31 verses)
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Sanskrit Text
रत्नराशीन्विनिक्षिप्य
दक्षिणार्थे
स
भारत
।
ततः
प्राह
द्विजश्रेष्ठान्विरूपाक्षो
महायशाः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
रत्न + राशि | विनिक्षिप्य | दक्षिणा + अर्थ | स | भारत
तान् | आगतान् | द्विजश्रेष्ठान् | विरूपाक्षो | विशां | पते
तान् | आगतान् | द्विजश्रेष्ठान् | विरूपाक्षो | विशां | पते