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Currently viewing: Parva 12 -
Chapter 12.104
(52 verses)
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Sanskrit Text
न
सद्योऽरीन्विनिर्हन्याद्दृष्टस्य
विजयोऽज्वरः
।
न
यः
शल्यं
घट्टयति
नवं
च
कुरुते
व्रणम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | सद्यो | ऽरीन् | विनिर्हन्याद् | दृष्टस्य | विजयो | ऽज्वरः
न | यः | शल्यं | घट्टयति | नवं | च | कुरुते | व्रणम्
न | यः | शल्यं | घट्टयति | नवं | च | कुरुते | व्रणम्