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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.94
(94 verses)
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Sanskrit Text
यस्य
हि
त्वं
सपत्नः
स्या
गन्धर्वस्यासुरस्य
वा
।
न
स
जातु
सुखं
जीवेत्त्वयि
क्रुद्धे
परंतप
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यस्य | हि | त्वं | सपत्नः | स्या | गन्धर्व + असुर | वा
न | स | जातु | सुखं | जीवेत् | त्वयि | क्रुद्धे | परंतप
न | स | जातु | सुखं | जीवेत् | त्वयि | क्रुद्धे | परंतप