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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.94
(94 verses)
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Sanskrit Text
दिव्यमस्त्रं
विकुर्वाणं
यथा
देवं
पुरंदरम्
।
कृत्स्नां
गङ्गां
समावृत्य
शरैस्तीक्ष्णैरवस्थितम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
दिव्यम् | अस्त्रं | विकुर्वाणं | यथा | देवं | पुरंदरम्
कृत्स्नां | गङ्गां | समावृत्य | शर + तीक्ष्ण | अवस्थितम्
कृत्स्नां | गङ्गां | समावृत्य | शर + तीक्ष्ण | अवस्थितम्