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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.88
(26 verses)
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Sanskrit Text
सत्येन
मे
द्यौश्च
वसुंधरा
च;
तथैवाग्निर्ज्वलते
मानुषेषु
।
न
मे
वृथा
व्याहृतमेव
वाक्यं;
सत्यं
हि
सन्तः
प्रतिपूजयन्ति
।
सर्वे
च
देवा
मुनयश्च
लोकाः;
सत्येन
पूज्या
इति
मे
मनोगतम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सत्येन | मे | दिव् + च | वसुंधरा | च | तथा + एव + अग्नि | ज्वलते | मानुषेषु
न | मे | वृथा | व्याहृतम् | एव | वाक्यं | सत्यं | हि | सन्तः | प्रतिपूजयन्ति
सर्वे | च | देवा | मुनि + च | लोकाः | सत्येन | पूज्या | इति | मे | मनोगतम्
न | मे | वृथा | व्याहृतम् | एव | वाक्यं | सत्यं | हि | सन्तः | प्रतिपूजयन्ति
सर्वे | च | देवा | मुनि + च | लोकाः | सत्येन | पूज्या | इति | मे | मनोगतम्