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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.88
(26 verses)
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Sanskrit Text
यो
नः
स्वर्गजितः
सर्वान्यथावृत्तं
निवेदयेत्
।
अनसूयुर्द्विजाग्रेभ्यः
स
लभेन्नः
सलोकताम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यो | नः | स्वर्ग + जित् | सर्वान् | यथावृत्तं | निवेदयेत्
अनसूयुर् | द्विज + अग्र | स | लभेन् | नः | सलोकताम्
अनसूयुर् | द्विज + अग्र | स | लभेन् | नः | सलोकताम्