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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.88
(26 verses)
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Sanskrit Text
ययातिरस्मि
नहुषस्य
पुत्रः;
पूरोः
पिता
सार्वभौमस्त्विहासम्
।
गुह्यमर्थं
मामकेभ्यो
ब्रवीमि;
मातामहोऽहं
भवतां
प्रकाशः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अहं | ययातिर् | नहुषस्य | पुत्रः | पूरोः | पिता | सर्व + भूत + अवमान
गुह्यम् | अर्थं | मामकेभ्यो | ब्रवीमि | मातामहो | ऽहं | भवतां | प्रकाशः
गुह्यम् | अर्थं | मामकेभ्यो | ब्रवीमि | मातामहो | ऽहं | भवतां | प्रकाशः