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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.72
(23 verses)
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Sanskrit Text
यत्रोषितं
विशालाक्षि
त्वया
चन्द्रनिभानने
।
तत्राहमुषितो
भद्रे
कुक्षौ
काव्यस्य
भामिनि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यत्र + वस् | विशाल + अक्ष | त्वया | चन्द्र + निभ + आनन
तत्र + मद् | उषितो | भद्रे | कुक्षौ | काव्यस्य | भामिनि
तत्र + मद् | उषितो | भद्रे | कुक्षौ | काव्यस्य | भामिनि