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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.71
(58 verses)
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Sanskrit Text
समन्युरुत्थाय
महानुभाव;स्तदोशना
विप्रहितं
चिकीर्षुः
।
काव्यः
स्वयं
वाक्यमिदं
जगाद;
सुरापानं
प्रति
वै
जातशङ्कः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
समन्युर् | उत्थाय | महत् + अनुभाव | तदा + उशनस् | विप्र + हित | चिकीर्षुः
काव्यः | स्वयं | वाक्यम् | इदं | जगाद | सुरा + पान | प्रति | वै | जन् + शङ्का
काव्यः | स्वयं | वाक्यम् | इदं | जगाद | सुरा + पान | प्रति | वै | जन् + शङ्का