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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.57
(106 verses)
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Sanskrit Text
तथैव
वेद्यां
कृष्णापि
जज्ञे
तेजस्विनी
शुभा
।
विभ्राजमाना
वपुषा
बिभ्रती
रूपमुत्तमम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तथा + एव | वेद्यां | कृष्णा + अपि | जज्ञे | तेजस्विनी | शुभा
विभ्राजमाना | वपुषा | बिभ्रती | रूपम् | उत्तमम्
विभ्राजमाना | वपुषा | बिभ्रती | रूपम् | उत्तमम्