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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.57
(106 verses)
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Sanskrit Text
एवं
द्वैपायनो
जज्ञे
सत्यवत्यां
पराशरात्
।
द्वीपे
न्यस्तः
स
यद्बालस्तस्माद्द्वैपायनोऽभवत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एवं | द्वैपायनो | जज्ञे | सत्यवत्यां | पराशरात्
द्वीपे | न्यस्तः | स | यद् | बाल + तद् | द्वैपायनो | ऽभवत्
द्वीपे | न्यस्तः | स | यद् | बाल + तद् | द्वैपायनो | ऽभवत्