Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.46
(41 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
स
क्षिप्रमुदकं
स्पृष्ट्वा
रोषादिदमुवाच
ह
।
पितरं
तेऽभिसंधाय
तेजसा
प्रज्वलन्निव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | क्षिप्रम् | उदकं | स्पृष्ट्वा | रोषाद् | इदम् | उवाच | ह
पितरं | ते | ऽभिसंधाय | तेजसा | प्रज्वलन्न् | इव
पितरं | ते | ऽभिसंधाय | तेजसा | प्रज्वलन्न् | इव