Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.32
(25 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
वृणीष्व
च
वरं
मत्तः
शेष
यत्तेऽभिकाङ्क्षितम्
।
दित्सामि
हि
वरं
तेऽद्य
प्रीतिर्मे
परमा
त्वयि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
वृणीष्व | च | वरं | मत्तः | शेष | यत् | ते | ऽभिकाङ्क्षितम्
दित्सामि | हि | वरं | ते | ऽद्य | प्रीतिर् | मे | परमा | त्वयि
दित्सामि | हि | वरं | ते | ऽद्य | प्रीतिर् | मे | परमा | त्वयि