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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.222
(18 verses)
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Sanskrit Text
यो
नो
द्वेष्टारमादाय
श्येनराज
प्रधावसि
।
भव
त्वं
दिवमास्थाय
निरमित्रो
हिरण्मयः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यो | नो | द्वेष्टारम् | आदाय | श्येन + राज | प्रधावसि
भव | त्वं | दिवम् | आस्थाय | निरमित्रो | हिरण्मयः
भव | त्वं | दिवम् | आस्थाय | निरमित्रो | हिरण्मयः