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Currently viewing: Parva 1 - Chapter 1.221 (21 verses)
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Chapter 1.221

ततः प्रज्वलिते शुक्रे शार्ङ्गकास्ते सुदुःखिताः व्यथिताः परमोद्विग्ना नाधिजग्मुः परायणम्
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ततः | प्रज्वलिते | शुक्रे | शार्ङ्गक + तद् | सु + दुःखित
व्यथिताः | परम + उद्विज् | न + अधिगम् | परायणम्
निशाम्य पुत्रकान्बालान्माता तेषां तपस्विनी जरिता दुःखसंतप्ता विललाप नरेश्वर
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निशाम्य | पुत्रकान् | बालान् | माता | तेषां | तपस्विनी
जरिता | दुःख + संतप् | विललाप | नरेश्वर
अयमग्निर्दहन्कक्षमित आयाति भीषणः जगत्संदीपयन्भीमो मम दुःखविवर्धनः
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अयम् | अग्निर् | दहन् | कक्षम् | इत | आयाति | भीषणः
जगत् | संदीपयन् | भीमो | मम | दुःख + विवर्धन
इमे मां कर्षयन्ति शिशवो मन्दचेतसः अबर्हाश्चरणैर्हीनाः पूर्वेषां नः परायणम् त्रासयंश्चायमायाति लेलिहानो महीरुहान्
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इमे | च | मां | कर्षयन्ति | शिशवो | मन्द + चेतस्
अबर्ह + चरण | हीनाः | पूर्वेषां | नः | परायणम्
त्रासय् + च + इदम् | आयाति | लेलिहानो | महीरुहान्
अशक्तिमत्त्वाच्च सुता शक्ताः सरणे मम आदाय शक्तास्मि पुत्रान्सरितुमन्यतः
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अशक्तिमत् + त्व + च | सुता | न | शक्ताः | सरणे | मम
आदाय | च | न | शक् + अस् | पुत्रान् | सरितुम् | अन्यतः
त्यक्तुमहं शक्ता हृदयं दूयतीव मे कं नु जह्यामहं पुत्रं कमादाय व्रजाम्यहम्
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न | च | त्यक्तुम् | अहं | शक्ता | हृदयं | दु + इव | मे
कं | नु | जह्याम् | अहं | पुत्रं | कम् | आदाय | व्रज् + मद्
किं नु मे स्यात्कृतं कृत्वा मन्यध्वं पुत्रकाः कथम् चिन्तयाना विमोक्षं वो नाधिगच्छामि किंचन छादयित्वा वो गात्रैः करिष्ये मरणं सह
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किं | नु | मे | स्यात् | कृतं | कृत्वा | मन्यध्वं | पुत्रकाः | कथम्
चिन्तयाना | विमोक्षं | वो | न + अधिगम् | किंचन
छादयित्वा | च | वो | गात्रैः | करिष्ये | मरणं | सह
जरितारौ कुलं हीदं ज्येष्ठत्वेन प्रतिष्ठितम् सारिसृक्वः प्रजायेत पितॄणां कुलवर्धनः
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जरितारौ | कुलं | हि + इदम् | ज्येष्ठ + त्व | प्रतिष्ठितम्
सारिसृक्कः | प्रजायेत | पितॄणां | कुल + वर्धन
स्तम्बमित्रस्तपः कुर्याद्द्रोणो ब्रह्मविदुत्तमः इत्येवमुक्त्वा प्रययौ पिता वो निर्घृणः पुरा
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स्तम्बमित्र + तपस् | कुर्याद् | द्रोणो | ब्रह्मन् + विद् | उत्तमः
इति + एवम् | उक्त्वा | प्रययौ | पिता | वो | निर्घृणः | पुरा
कमुपादाय शक्येत गन्तुं कस्यापदुत्तमा किं नु कृत्वा कृतं कार्यं भवेदिति विह्वला
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कम् | उपादाय | शक्येत | गन्तुं | क + आपद् | उत्तमा
किं | नु | कृत्वा | कृतं | कार्यं | भवेद् | इति | च | विह्वला
नापश्यत्स्वधिया मोक्षं स्वसुतानां तदानलात् एवं ब्रुवन्तीं शार्ङ्गास्ते प्रत्यूचुरथ मातरम्
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न + पश् | स्व + धी | मोक्षं | स्व + सुत | तदा + अनल
एवं | ब्रुवन्तीं | शार्ङ्ग + तद् | प्रत्यूचुर् | अथ | मातरम्
स्नेहमुत्सृज्य मातस्त्वं पत यत्र हव्यवाट् अस्मासु हि विनष्टेषु भवितारः सुतास्तव त्वयि मातर्विनष्टायां नः स्यात्कुलसंततिः
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स्नेहम् | उत्सृज्य | मातृ + त्वद् | पत | यत्र | न | हव्यवाट्
अस्मासु | हि | विनष्टेषु | भवितारः | सुत + त्वद्
त्वयि | मातर् | विनष्टायां | न | नः | स्यात् | कुल + संतति
अन्ववेक्ष्यैतदुभयं क्षमं स्याद्यत्कुलस्य नः तद्वै कर्तुं परः कालो मातरेष भवेत्तव
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अन्ववेक्ष् + एतद् | उभयं | क्षमं | स्याद् | यत् | कुलस्य | नः
तद् | वै | कर्तुं | परः | कालो | मातर् | एष | भवेत् | तव
मा वै कुलविनाशाय स्नेहं कार्षीः सुतेषु नः हीदं कर्म मोघं स्याल्लोककामस्य नः पितुः
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मा | वै | कुल + विनाश | स्नेहं | कार्षीः | सुतेषु | नः
न | हि + इदम् | कर्म | मोघं | स्याल् | लोक + काम | नः | पितुः
इदमाखोर्बिलं भूमौ वृक्षस्यास्य समीपतः तदाविशध्वं त्वरिता वह्नेरत्र वो भयम्
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इदम् | आखोर् | बिलं | भूमौ | वृक्ष + इदम् | समीपतः
तद् | आविशध्वं | त्वरिता | वह्नेर् | अत्र | न | वो | भयम्
ततोऽहं पांसुना छिद्रमपिधास्यामि पुत्रकाः एवं प्रतिकृतं मन्ये ज्वलतः कृष्णवर्त्मनः
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ततो | ऽहं | पांसुना | छिद्रम् | अपिधास्यामि | पुत्रकाः
एवं | प्रतिकृतं | मन्ये | ज्वलतः | कृष्णवर्त्मनः
तत एष्याम्यतीतेऽग्नौ विहर्तुं पांसुसंचयम् रोचतामेष वोपायो विमोक्षाय हुताशनात्
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तत | इ + अती | ऽग्नौ | विहर्तुं | पांसु + संचय
रोचताम् | एष | वा + उपाय | विमोक्षाय | हुताशनात्
अबर्हान्मांसभूतान्नः क्रव्यादाखुर्विनाशयेत् पश्यमाना भयमिदं शक्ष्यामो निषेवितुम्
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अबर्हान् | मांस + भू | नः | क्रव्याद + आखु | विनाशयेत्
पश्यमाना | भयम् | इदं | न | शक्ष्यामो | निषेवितुम्
कथमग्निर्न नो दह्यात्कथमाखुर्न भक्षयेत् कथं स्यात्पिता मोघः कथं माता ध्रियेत नः
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कथम् | अग्निर् | न | नो | दह्यात् | कथम् | आखुर् | न | भक्षयेत्
कथं | न | स्यात् | पिता | मोघः | कथं | माता | नः
बिल आखोर्विनाशः स्यादग्नेराकाशचारिणाम् अन्ववेक्ष्यैतदुभयं श्रेयान्दाहो भक्षणम्
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बिल | आखोर् | विनाशः | स्याद् | अग्नेर् | आकाशचारिणाम्
अन्ववेक्ष् + एतद् | उभयं | श्रेयान् | दाहो | न | भक्षणम्
गर्हितं मरणं नः स्यादाखुना खादता बिले शिष्टादिष्टः परित्यागः शरीरस्य हुताशनात्
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गर्हितं | मरणं | नः | स्याद् | आखुना | खादता | बिले
शिष्टाद् | इष्टः | परित्यागः | शरीरस्य | हुताशनात्