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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.215
(19 verses)
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Sanskrit Text
ब्राह्मणो
बहुभोक्तास्मि
भुञ्जेऽपरिमितं
सदा
।
भिक्षे
वार्ष्णेयपार्थौ
वामेकां
तृप्तिं
प्रयच्छताम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ब्राह्मणो | बहु + भोक्तृ + अस् | भुञ्जे | ऽपरिमितं | सदा
भिक्षे | वार्ष्णेय + पार्थ | वाम् | एकां | तृप्तिं | प्रयच्छताम्
भिक्षे | वार्ष्णेय + पार्थ | वाम् | एकां | तृप्तिं | प्रयच्छताम्