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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.208
(21 verses)
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Sanskrit Text
उत्कृष्ट
एव
तु
ग्राहः
सोऽर्जुनेन
यशस्विना
।
बभूव
नारी
कल्याणी
सर्वाभरणभूषिता
।
दीप्यमाना
श्रिया
राजन्दिव्यरूपा
मनोरमा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
उत्कृष्ट | एव | तु | ग्राहः | सो | ऽर्जुनेन | यशस्विना
त्वं | हि | सर्व + अनवद्य + अङ्ग | सर्व + आभरण + भूषय्
दीप्यमाना | श्रिया | राजन् | दिव्य + रूप | मनोरमा
त्वं | हि | सर्व + अनवद्य + अङ्ग | सर्व + आभरण + भूषय्
दीप्यमाना | श्रिया | राजन् | दिव्य + रूप | मनोरमा