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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.208
(21 verses)
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Sanskrit Text
अहं
च
सौरभेयी
च
समीची
बुद्बुदा
लता
।
यौगपद्येन
तं
विप्रमभ्यगच्छाम
भारत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अहं | च | सौरभेयी | च | समीची | बुद्बुदा | लता
यौगपद्येन | तं | विप्रम् | अभ्यगच्छाम | भारत
यौगपद्येन | तं | विप्रम् | अभ्यगच्छाम | भारत