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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.202
(27 verses)
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Sanskrit Text
राजर्षयो
महायज्ञैर्हव्यकव्यैर्द्विजातयः
।
तेजो
बलं
च
देवानां
वर्धयन्ति
श्रियं
तथा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
राजन् + ऋषि | महत् + यज्ञ | हव्य + कव्य | द्विजातयः
तेजो | बलं | च | देवानां | वर्धयन्ति | श्रियं | तथा
तेजो | बलं | च | देवानां | वर्धयन्ति | श्रियं | तथा