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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.2
(243 verses)
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Sanskrit Text
तत
आश्रमवासाक्यं
पर्व
पञ्चदशं
स्मृतम्
।
यत्र
राज्यं
परित्यज्य
गान्धारीसहितो
नृपः
।
धृतराष्ट्राश्रमपदं
विदुरश्च
जगाम
ह
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत | पर्व | पञ्चदशं | स्मृतम्
यत्र | राज्यं | परित्यज्य | गान्धारी + सहित | नृपः
धृतराष्ट्र + आश्रम + पद | विदुर + च | जगाम | ह
यत्र | राज्यं | परित्यज्य | गान्धारी + सहित | नृपः
धृतराष्ट्र + आश्रम + पद | विदुर + च | जगाम | ह