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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.189
(49 verses)
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Sanskrit Text
स
तद्विवृत्य
शिखरं
महागिरे;स्तुल्यद्युतींश्चतुरोऽन्यान्ददर्श
।
स
तानभिप्रेक्ष्य
बभूव
दुःखितः;
कच्चिन्नाहं
भविता
वै
यथेमे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | तद् | विवृत्य | शिखरं | महत् + गिरि | तुल्य + द्युति + चतुर् | ऽन्यान् | ददर्श
स | तान् | अभिप्रेक्ष्य | बभूव | दुःखितः | कच्चिन् | न + मद् | भविता | वै | यथा + इदम्
स | तान् | अभिप्रेक्ष्य | बभूव | दुःखितः | कच्चिन् | न + मद् | भविता | वै | यथा + इदम्