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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.189
(49 verses)
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Sanskrit Text
दृष्ट्वा
च
तद्विस्मितास्ते
बभूवु;स्तेषामिन्द्रस्तत्र
शूरो
जगाम
।
सोऽपश्यद्योषामथ
पावकप्रभां;
यत्र
गङ्गा
सततं
संप्रसूता
॥
Padaccheda (Word Analysis)
दृष्ट्वा | च | तद् | विस्मि + तद् | बभूवुस् | तेषाम् | इन्द्र + तत्र | शूरो | जगाम
सो | ऽपश्यद् | योषाम् | अथ | पावक + प्रभा | यत्र | गङ्गा | सततं | सम्प्रसूता
सो | ऽपश्यद् | योषाम् | अथ | पावक + प्रभा | यत्र | गङ्गा | सततं | सम्प्रसूता