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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.185
(28 verses)
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Sanskrit Text
निःसंशयं
क्षत्रियपुंगवास्ते;
यथा
हि
युद्धं
कथयन्ति
राजन्
।
आशा
हि
नो
व्यक्तमियं
समृद्धा;
मुक्तान्हि
पार्थाञ्शृणुमोऽग्निदाहात्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
निःसंशयं | क्षत्रिय + पुंगव + तद् | यथा | हि | युद्धं | कथयन्ति | राजन्
आशा | हि | नो | व्यक्तम् | इयं | समृद्धा | मुक्तान् | हि | पार्थाञ् | शृणुमो | अग्नि + दाह
आशा | हि | नो | व्यक्तम् | इयं | समृद्धा | मुक्तान् | हि | पार्थाञ् | शृणुमो | अग्नि + दाह