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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.182
(15 verses)
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Sanskrit Text
एवंगते
यत्करणीयमत्र;
धर्म्यं
यशस्यं
कुरु
तत्प्रचिन्त्य
।
पाञ्चालराजस्य
च
यत्प्रियं
स्या;त्तद्ब्रूहि
सर्वे
स्म
वशे
स्थितास्ते
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एवंगते | यत् | करणीयम् | अत्र | धर्म्यं | यशस्यं | कुरु | तत् | प्रचिन्त्य
पाञ्चाल + राज | च | यत् | प्रियं | स्यात् | तद् | ब्रूहि | सर्वे | स्म | वशे | स्था + त्वद्
पाञ्चाल + राज | च | यत् | प्रियं | स्यात् | तद् | ब्रूहि | सर्वे | स्म | वशे | स्था + त्वद्