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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.173
(24 verses)
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Sanskrit Text
शापं
प्राप्तोऽसि
दुर्धर्ष
न
पापं
कर्तुमर्हसि
।
ऋतुकाले
तु
संप्राप्ते
भर्त्रास्म्यद्य
समागता
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शापं | प्राप्तो | ऽसि | दुर्धर्ष | न | पापं | कर्तुम् | अर्हसि
ऋतु + काल | तु | सम्प्राप्ते | भर्तारं | न | हा + तदा
ऋतु + काल | तु | सम्प्राप्ते | भर्तारं | न | हा + तदा