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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.170
(21 verses)
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Sanskrit Text
आयुषा
हि
प्रकृष्टेन
यदा
नः
खेद
आविशत्
।
तदास्माभिर्वधस्तात
क्षत्रियैरीप्सितः
स्वयम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
आयुषा | हि | प्रकृष्टेन | यदा | नः | खेद | आविशत्
तदा + मद् | वध + तात | क्षत्रियैर् | ईप्सितः | स्वयम्
तदा + मद् | वध + तात | क्षत्रियैर् | ईप्सितः | स्वयम्