Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.167
(21 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
वध्वादृश्यन्त्यानुगत
आश्रमाभिमुखो
व्रजन्
।
अथ
शुश्राव
संगत्या
वेदाध्ययननिःस्वनम्
।
पृष्ठतः
परिपूर्णार्थैः
षड्भिरङ्गैरलंकृतम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
वधू + अदृश्यन्ती + अनुगम् | आश्रम + अभिमुख | व्रजन्
अथ | शुश्राव | संगत्या | वेद + अध्ययन + निःस्वन
पृष्ठतः | परिपृ + अर्थ | षड्भिर् | अङ्गैर् | अलंकृतम्
अथ | शुश्राव | संगत्या | वेद + अध्ययन + निःस्वन
पृष्ठतः | परिपृ + अर्थ | षड्भिर् | अङ्गैर् | अलंकृतम्