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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.165
(44 verses)
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Sanskrit Text
एवमुक्तस्तदा
पार्थ
विश्वामित्रो
बलादिव
।
हंसचन्द्रप्रतीकाशां
नन्दिनीं
तां
जहार
गाम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एवम् | वच् + तदा | पार्थ | विश्वामित्रो | बलाद् | इव
हंस + चन्द्र + प्रतीकाश | नन्दिनीं | तां | जहार | गाम्
हंस + चन्द्र + प्रतीकाश | नन्दिनीं | तां | जहार | गाम्