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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.163
(23 verses)
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Sanskrit Text
वसिष्ठेनाभ्यनुज्ञातस्तस्मिन्नेव
धराधरे
।
सोऽकामयत
राजर्षिर्विहर्तुं
सह
भार्यया
॥
Padaccheda (Word Analysis)
वसिष्ठ + अभ्यनुज्ञा + तद् | एव | धराधरे
सो | ऽकामयत | राजर्षिर् | विहर्तुं | सह | भार्यया
सो | ऽकामयत | राजर्षिर् | विहर्तुं | सह | भार्यया