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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.162
(18 verses)
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Sanskrit Text
ततस्तस्याज्ञया
राज्ञो
विप्रतस्थे
महद्बलम्
।
स
तु
राजा
गिरिप्रस्थे
तस्मिन्पुनरुपाविशत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततस् + तद् + आज्ञा | राज्ञो | विप्रतस्थे | महद् | बलम्
स | तु | राजा | गिरि + प्रस्थ | तस्मिन् | पुनर् | उपाविशत्
स | तु | राजा | गिरि + प्रस्थ | तस्मिन् | पुनर् | उपाविशत्