Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.160
(41 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
गिरिप्रस्थे
तु
सा
यस्मिन्स्थिता
स्वसितलोचना
।
स
सवृक्षक्षुपलतो
हिरण्मय
इवाभवत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
गिरि + प्रस्थ | तु | सा | यस्मिन् | स्थिता | स्वसित + लोचन
स | स + वृक्ष + क्षुप + लता | हिरण्मय | इव + भू
स | स + वृक्ष + क्षुप + लता | हिरण्मय | इव + भू