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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.151
(24 verses)
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Sanskrit Text
महाकायो
महावेगो
दारयन्निव
मेदिनीम्
।
त्रिशिखां
भृकुटिं
कृत्वा
संदश्य
दशनच्छदम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
महत् + काय | महत् + वेग | दारयन्न् | इव | मेदिनीम्
त्रि + शिखा | भृकुटिं | कृत्वा | संदश्य | दशनच्छदम्
त्रि + शिखा | भृकुटिं | कृत्वा | संदश्य | दशनच्छदम्